भिलाई के प्रतिष्ठित और ऐतिहासिक मैत्री बाग जू के संचालन को लेकर जल्द ही बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। प्रदेश का पहला जू, जो पिछले छह दशकों से भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) की टाउनशिप में संचालित होता आ रहा है, अब छत्तीसगढ़ सरकार को सौंपे जाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन ने बीएसपी प्रबंधन के साथ मीटिंग में मैत्री बाग को पर्यटन विभाग व वन विभाग के संयुक्त संचालन में देने का प्रस्ताव रखा है। बताया जा रहा है कि बीएसपी प्रबंधन ने भी इस प्रस्ताव पर सकारात्मक संकेत दिए हैं, और जल्द ही अंतिम निर्णय राज्य सरकार के साथ समन्वय के बाद लिया जाएगा।
निजीकरण की प्रक्रिया के बीच आया नया मोड़
बीएसपी फिलहाल मैत्री बाग को एक निजी एजेंसी को सौंपने की प्रक्रिया में था। इसके लिए EOI भी जारी कर दिया गया है।
करीब 60 साल पुराने जू को पहली बार पूरी तरह आउटसोर्स करने की तैयारी थी, जिसकी मुख्य वजह है—हर साल होने वाला भारी वित्तीय घाटा।
मैनेजमेंट का तर्क है कि जू के रख-रखाव पर लगभग 4 करोड़ रुपए खर्च किए जाते हैं, जबकि टिकट और सुविधाओं से हर साल केवल 1.5 करोड़ रुपए की आय होती है। यानी बीएसपी पर हर साल लगभग ढाई करोड़ रुपए का सीधा घाटा बैठता है।
इसी बीच सरकार को हैंडओवर करने का प्रस्ताव सामने आने से पूरा मामला नया मोड़ ले चुका है।
विधायक का तर्क—राज्य सरकार करेगी बड़े स्तर पर विकास
विधायक रिकेश सेन का कहना है कि राज्य सरकार के अधीन आने पर मैत्री बाग को—
- आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर
- पर्यटन सुविधाओं का विस्तार
- पर्यावरण संरक्षण आधारित प्रोजेक्ट
- बेहतर प्रबंधन
- और कर्मचारियों की सुरक्षित व्यवस्था
—जैसे लाभ मिल सकते हैं।
वे कहते हैं कि कर्मचारियों की नियुक्ति आउटसोर्सिंग मॉडल के तहत भी की जा सकती है, जिससे किसी की नौकरी पर संकट नहीं आएगा।
‘वाइट टाइगर हब’ की पहचान
मैत्री बाग देश के उन चुनिंदा जू में से है, जहां सफेद बाघों का सफल प्रजनन होता है।
यहां अब तक 19 सफेद बाघों का जन्म हो चुका है, जिनमें से 13 को देशभर के कई जू में भेजा गया है।
वर्तमान में यहां 6 व्हाइट टाइगर मौजूद हैं।
देश के कुल 160 सफेद बाघों में से 19 अकेले मैत्री बाग की देन हैं—इसलिए इसे ‘व्हाइट टाइगर हब’ कहा जाता है।
1965 से शुरू हुआ सफर
- मैत्री बाग की शुरुआत 1965 में एक साधारण गार्डन के रूप में हुई थी।
- 1972 में यह जू के रूप में विकसित किया गया।
- शुरूआती दिनों में यहां केवल भालू और बंदर थे।
- 1976-78 के बीच शेर और बाघ भी यहां लाए गए।
- 140 एकड़ में फैला यह परिसर आज लगभग 400 वन्य प्राणियों का घर है।
साथ ही बोटिंग, टॉय ट्रेन, म्यूजिकल फाउंटेन और गार्डन जैसी सुविधाओं के कारण यह परिवारों का पसंदीदा पिकनिक स्पॉट है।
आर्थिक संकट—BSP क्यों चाहती है आउटसोर्सिंग?
- खर्च: 4 करोड़/वर्ष
- आय: 1.5 करोड़/वर्ष
- घाटा: 2.5 करोड़/वर्ष
फिलहाल बोटिंग, पार्किंग और गार्डन पहले से ठेके पर हैं, लेकिन पूरा जू पहली बार निजी हाथों में जाने की कगार पर था। माना जा रहा है कि निजी एजेंसी आते ही टिकट दरों में बढ़ोतरी की संभावना भी है।
BSP के शिक्षा संस्थानों पर भी बड़ा फैसला संभव
सूत्रों के मुताबिक बीएसपी टाउनशिप के स्कूलों को भी बड़े एजुकेशनल ग्रुप को 30 साल की लीज पर देने की तैयारी है।
हालांकि वर्तमान छात्रों की फीस बारहवीं तक वही रखे जाने की बात सामने आई है।
उधर बीएसपी–CSPDCL के नए MOU को लेकर कुछ कर्मचारियों ने आपत्ति जताई है। विधायक रिकेश सेन ने जल्द इस मुद्दे पर चर्चा का भरोसा दिया है।
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