छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में नक्सल मोर्चे पर बड़ी सफलता मिली है। मंगलवार को कुल 28 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला लिया। इनमें से 22 माओवादी ऐसे थे जिन पर कुल 89 लाख रुपये का इनाम था। बस्तर रेंज के आईजी सुंदरराज पट्टिलिंगम ने बताया कि सरेंडर करने वालों में 19 महिलाएँ शामिल हैं और सभी ने राज्य सरकार की ‘नियाद नेल्लनार’ योजना, नई सरेंडर व पुनर्वास नीति और ‘पूना मरघम’ कार्यक्रम से प्रेरित होकर हथियार डाले हैं।
सरेंडर करने वालों में चार सबसे कुख्यात नाम—पंडी ध्रुव उर्फ दिनेश, दुले मंडावी उर्फ मुन्नी, छत्तीस पोयम और पदनी ओयम—शामिल हैं। ये सभी ईस्ट बस्तर डिवीजन की मिलिट्री कंपनी नंबर 6 के सक्रिय सदस्य थे और हर एक पर 8-8 लाख रुपये का इनाम घोषित था। इनके अलावा लखमू उसेंडी, सुकमती नुरेती, सकीला कश्यप, शंबत्ती शोरी, चैते उर्फ रजिता और बुधरा रावा जैसे एरिया कमेटी स्तर के नक्सलियों ने भी सरेंडर किया है, जिन पर 5-5 लाख का इनाम था।
आईजी ने यह भी बताया कि पिछले 50 दिनों में बस्तर रेंज के सात ज़िलों में 512 से अधिक माओवादी हिंसा छोड़कर वापस मुख्यधारा में लौट चुके हैं। नारायणपुर के एसपी रॉबिन्सन गुरिया के अनुसार, इस साल जिले में सरेंडर करने वाले नक्सलियों की संख्या 287 तक पहुँच गई है। हाल ही में सुकमा में भी 48 लाख के इनामी 15 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया था। उनमें बटालियन नंबर-1 के सदस्य भी थे, जिसे माओवादी संगठन की सबसे ताकतवर इकाई माना जाता है। आत्मसमर्पित नक्सलियों ने खुलासा किया कि हिड़मा की मौत और सुरक्षा बलों के लगातार ऑपरेशनों ने संगठन की रीढ़ हिला दी है। जंगलों में बढ़ते दबाव और नेतृत्व संकट के कारण बड़ी संख्या में नक्सली संगठन छोड़कर लौट रहे हैं।
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