केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की लाड़ली बहना योजना ने देशभर में महिला कल्याण और सामाजिक उत्थान की एक ऐसी नई धारा प्रवाहित की है, जिसने भारतीय राजनीति के समीकरण ही बदलकर रख दिए हैं। इस मॉडल की सफलता ने राज्यों को भी अपनी नीतियाँ नए सिरे से गढ़ने के लिए प्रेरित किया है।
आज देश के अलग-अलग हिस्सों में महिलाओं के सम्मान और सशक्तिकरण को केंद्र में रखकर योजनाएँ चलाई जा रही हैं—
मध्यप्रदेश की लाड़ली बहना योजना,
महाराष्ट्र की लाडकी बहीण योजना,
झारखंड की मइयां सम्मान योजना,
और अब बिहार ने भी मुख्यमंत्री महिला रोज़गार योजना को भारी समर्थन देकर अपना स्पष्ट जनादेश दे दिया है।
बिहार की जनता ने इस चुनाव में बता दिया कि महिला सशक्तिकरण अब केवल वादा नहीं, बल्कि राजनीति का सबसे निर्णायक एजेंडा बन चुका है।
दूसरी ओर, बिहार के मतदाताओं ने अपने फैसले से यह भी साबित कर दिया कि वे हर मुद्दे, हर नीति और हर चेहरे को बारीकी से परखते हैं। इस बार जनता ने भरोसे और उम्मीदों से भरा अभूतपूर्वमत देकर NDA के पक्ष में आसमान जितना जनसमर्थन जुटाया।
वहीं मुकामा में तेजस्वी यादव का राजनीतिक प्रदर्शन उम्मीदों के उलट बेहद कमजोर रहा। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा जोरों पर है कि मुकामा की धरती ने उन्हें इस बार पूरी तरह नकार दिया।
लोगों के बीच यह बात तेजी से फैल रही है कि तेजस्वी का प्रभाव अब पहले जैसा नहीं रहा और वे बिहार की राजनीति में एक ‘कमज़ोर और स्वीकार न किए जाने वाले नेता’ के रूप में उभर रहे हैं।
चुनाव के नतीजे साफ दिखाते हैं कि बिहार ने उन्हें लगभग पूरी तरह से खारिज कर दिया है।
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