रायपुर। छत्तीसगढ़ में “अमृत काल” और “0% भ्रष्टाचार, जीरो टॉलरेंस” के दावों के बीच महिला एवं बाल विकास विभाग की एक खरीद प्रक्रिया अब सवालों के घेरे में आ गई है। विभाग द्वारा प्रदेश के करीब 350 स्कूलों के लिए 35 लाख सेनेटरी पैड खरीदे जाने के निर्णय को लेकर भंडार क्रय नियमों के उल्लंघन की आशंका जताई जा रही है।
बताया जा रहा है कि यह खरीद सरकार के अधिकृत प्लेटफॉर्म GeM (गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस) के बजाय ऐसे फर्म को दी गई, जो न तो सेनेटरी पैड की उत्पादक कंपनी है और न ही मेडिकल सप्लायर के रूप में पंजीकृत है। हैरानी की बात यह है कि सरगुजा संभाग के कोरिया जिले की एक फर्नीचर सप्लाई करने वाली फर्म – “महामाया फर्नीचर” को सेनेटरी पैड सप्लाई का आदेश दे दिया गया।
सूत्रों के अनुसार, इस निर्णय से सरकार को लाखों रुपये के संभावित आर्थिक नुकसान की बात कही जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि खरीद प्रक्रिया में नियमों का पालन नहीं किया गया, तो यह मामला गंभीर वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में आ सकता है।
राजनीतिक दृष्टि से भी यह मामला संवेदनशील माना जा रहा है। छत्तीसगढ़ के प्रथम आदिवासी मुख्यमंत्री विष्णु देव साय स्वयं सरगुजा संभाग से आते हैं, और सरकार के कई महत्वपूर्ण निर्णय इसी संभाग से प्रभावित माने जाते हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या मुख्यमंत्री के “जीरो टॉलरेंस” के दावे उनके ही संभाग में कमजोर पड़ते नजर आ रहे हैं?

विपक्ष के साथ-साथ सत्ता पक्ष के भीतर भी अब यह चर्चा तेज है कि आखिर फर्नीचर सप्लायर को मेडिकल उत्पाद की सप्लाई का काम कैसे सौंपा गया?
क्या नियमों की अनदेखी जानबूझकर की गई या फिर यह प्रशासनिक लापरवाही का मामला है — इसका जवाब अब विभाग और सरकार को देना होगा।
Leave a comment