बिहार: PK की एंट्री और रिकॉर्ड-तोड़ वोटिंग ने बदला सियासी मिज़ाज, नतीजे होंगे अप्रत्याशित बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का पहला चरण कई मायनों में ऐतिहासिक रहा है। 6 नवंबर को 18 ज़िलों की 121 सीटों पर हुए मतदान ने 73 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया है। चुनाव आयोग के अनुसार, पहले चरण में 64.69% वोटिंग हुई, जो 1952 के बाद सर्वाधिक है। इस रिकॉर्ड-तोड़ मतदान के साथ, प्रशांत किशोर (PK) के ‘जन सुराज’ अभियान की एंट्री ने बिहार के पारंपरिक चुनावी समीकरणों को पूरी तरह से हिलाकर रख दिया है। राजनीतिक गलियारों में अब 14 नवंबर को आने वाले नतीजे बेहद अप्रत्याशित रहने का अनुमान है।
बदलाव की लहर या जनादेश का संकेत?
पहले चरण के मतदान प्रतिशत में अप्रत्याशित उछाल (2020 के 57.29% से काफी अधिक) ने सभी राजनीतिक दलों की बेचैनी बढ़ा दी है।
प्रशांत किशोर का मत: जन सुराज के प्रमुख प्रशांत किशोर ने इस बढ़े हुए मतदान प्रतिशत को सीधे तौर पर ‘बदलाव की लहर’ और ‘जनता के मूड’ का संकेत बताया है। उनका दावा है कि 60% से अधिक लोग बदलाव चाहते हैं, और जन सुराज ने उन्हें जाति-आधारित राजनीति से ऊपर उठकर एक नया विकल्प प्रदान किया है।
आम तौर पर, अधिक मतदान को सत्ता विरोधी लहर (एंटी-इनकम्बेंसी) से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन इस बार जन सुराज की उपस्थिति ने इस फैक्टर को और भी जटिल बना दिया है।
जन सुराज का ‘गेमचेंजर’ प्रभाव: दोनों गठबंधनों के लिए सिरदर्द
प्रशांत किशोर की ज़मीनी पकड़ और विकास-केंद्रित रणनीति ने बिहार के पारंपरिक जातिगत समीकरणों में गहरी सेंध लगाई है।
चुनावी बेचैनी: राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, जन सुराज इस चुनाव में किंगमेकर की भूमिका में आ सकता है। यह अभियान कुल 62 सीटों पर मुख्य गठबंधनों के लिए गंभीर परेशानी का कारण बन गया है—जिसमें BJP की 35 सीटें और महागठबंधन की 27 सीटें शामिल हैं।
सबसे बड़ा नुकसान BJP को? उद्धरणों में यह साफ है कि जन सुराज की चुनौती से सबसे ज़्यादा नुकसान भारतीय जनता पार्टी (BJP) को होने की आशंका है।
पारंपरिक समीकरणों में सेंधमारी: जन सुराज की रणनीति जाति से ऊपर उठकर सीधे जनता से संवाद और विकास के मुद्दों पर केंद्रित है। यह दशकों से चली आ रही जाति-आधारित राजनीति को कड़ी चुनौती दे रही है, जिससे पारंपरिक वोट बैंक बिखरने का खतरा पैदा हो गया है।
फोकस में युवा और दलित/पिछड़ा वर्ग: PK की नज़रें विशेष रूप से पिछड़ा, दलित और युवा वोटरों पर टिकी हैं। कई विधानसभा क्षेत्रों में, जन सुराज के उम्मीदवारों की एंट्री को ‘गेमचेंजर’ माना जा रहा है।
PK का बड़ा दावा: “या तो 10 से कम या 150 से अधिक”
प्रशांत किशोर ने स्वयं अपने अभियान के लिए एक अति-आत्मविश्वासी दावा किया है, जो बताता है कि वह किसी छोटे-मोटे फेरबदल की नहीं, बल्कि एक बड़े राजनीतिक परिवर्तन की उम्मीद कर रहे हैं।
यह रिकॉर्ड तोड़ मतदान और प्रशांत किशोर की “जन सुराज” की अप्रत्याशित उपस्थिति, दोनों ही 14 नवंबर को आने वाले चुनाव नतीजों को बेहद अप्रत्याशित और ऐतिहासिक बना सकते हैं। राजनीतिक पंडितों की निगाहें अब 11नवंबर को होने वाले दूसरे चरण के मतदान पर टिकी हैं।
Leave a comment