बिहार में करारी हार के बाद कांग्रेस एक बड़ा राजनीतिक कदम उठाने की तैयारी में है। पार्टी के शीर्ष सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस जल्द ही RJD से गठबंधन तोड़कर महागठबंधन से अलग हो सकती है। इसकी औपचारिक घोषणा नए साल तक होने की संभावना जताई जा रही है।
27 नवंबर को दिल्ली में हुई विस्तृत समीक्षा बैठक में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और केसी वेणुगोपाल ने बिहार के सभी हारे हुए उम्मीदवारों से बंद कमरे में बातचीत की। इसी बैठक के बाद राज्य में नए राजनीतिक रास्ते चुनने को लेकर संकेत मिले हैं।
कांग्रेस का नया रास्ता: पुराने सामाजिक समीकरणों पर वापसी
बैठक में मौजूद एक वरिष्ठ बिहार कांग्रेस नेता के मुताबिक, पार्टी अब EBC–OBC पर अत्यधिक निर्भरता छोड़कर अपने पारंपरिक वोट बैंक मुस्लिम, दलित, ब्राह्मण और भूमिहार पर दोबारा फोकस करेगी।
जातीय सर्वे के अनुसार बिहार की कुल आबादी में
- मुस्लिम – 18%
- दलित – 19.65%
- ब्राह्मण – 3.66%
- भूमिहार – 2.86%
इन वर्गों की सम्मिलित हिस्सेदारी लगभग 44% है। कांग्रेस अब इसी सामाजिक आधार को पुनर्जीवित करने की रणनीति पर काम कर रही है।
प्रदेश नेतृत्व बना रहेगा, संगठन में बड़े बदलाव की तैयारी
हार के बाद कई नेताओं ने प्रदेश अध्यक्ष बदलने की मांग उठाई थी, लेकिन हाईकमान ने स्पष्ट किया कि अभी नेतृत्व में कोई बदलाव नहीं होगा।
हालांकि, संगठन को नए सिरे से तैयार करने के लिए युवा चेहरों को बड़े स्तर पर मौका दिए जाने की संभावना है।
प्रखंड स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक नई नियुक्तियों की प्रक्रिया जल्द शुरू हो सकती है। साथ ही विधायक दल के नेता की घोषणा भी जल्द की जा सकती है।
2029 से पहले बिहार में ‘आत्मनिर्भर कांग्रेस’ की योजना
पार्टी रणनीतिकारों का कहना है कि अगले चार साल बिहार में कोई चुनाव नहीं है। ऐसे में कांग्रेस अपना मजबूत ग्राउंड तैयार करना चाहती है और RJD पर निर्भरता खत्म कर ‘स्वतंत्र पहचान’ बनाने की कोशिश करेगी।
कई नेताओं का मानना है कि 2014 के बाद RJD के साथ गठबंधन ने पार्टी को फायदा से ज्यादा नुकसान पहुंचाया है।
पप्पू यादव से दूरी बनाने के संकेत
चुनाव में पप्पू यादव के साथ कांग्रेस की नजदीकियों से पार्टी को काफी नुकसान बताया गया है। पूर्णिया में कांग्रेस की करारी हार ने हाईकमान को चौंका दिया।
सूत्रों के मुताबिक, समीक्षा बैठक में राहुल गांधी ने पप्पू यादव से मिलने से भी इनकार कर दिया। ऐसे में भविष्य में कांग्रेस उनसे दूरी बनाती दिख सकती है।
नेताओं ने हार के बताए तीन प्रमुख कारण
- टिकट वितरण में भारी गड़बड़ी, आयातित नेताओं को प्राथमिकता, और पैसों के लेन-देन के आरोप।
- महागठबंधन में तालमेल की भारी कमी, कोर वोटरों का टूटना।
- सीमांचल में AIMIM के कारण मुस्लिम वोटों का शिफ्ट होना।
विशेषज्ञ की राय: BJP को हो सकता है फायदा
वरिष्ठ पत्रकार आदेश रावल का मानना है कि अगर RJD और कांग्रेस अलग लड़ती हैं तो विपक्षी वोट विभाजित होंगे और इसका सीधा फायदा BJP को मिल सकता है।
उनके अनुसार अचानक सामाजिक समीकरण बदलना कांग्रेस की रणनीति पर सवाल खड़े करता है।
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