बिना स्वाद, बिना गंध — यही रिसिन को इतना ख़तरनाक बनाता है। अगर इसे खाने या पानी में मिला दिया जाए, तो किसी को ज़रा भी भनक नहीं लगती।
मामला गुजरात का है — जहाँ ATS ने एक बड़ी आतंकी साजिश को नाकाम किया है।
गिरफ्तार आरोपी डॉ. अहमद मोहीउद्दीन सैयद, जिसने चीन से MBBS की पढ़ाई की है, अपनी मेडिकल जानकारी का इस्तेमाल आतंक फैलाने के लिए कर रहा था।
सूत्रों के अनुसार, वह अरंडी के बीजों से रिसिन ज़हर तैयार कर रहा था, ताकि दिल्ली, लखनऊ और अहमदाबाद जैसे शहरों में पानी और प्रसाद में मिलाकर जनसंहार जैसी साजिश को अंजाम दे सके।
डॉ. सैयद के साथ मोहम्मद सुहेल और आज़ाद नाम के दो और आरोपी भी पकड़े गए हैं।
ये तीनों Telegram के ज़रिए ISIS हैंडलर्स से संपर्क में थे और पाकिस्तान से ड्रोन के माध्यम से हथियारों की सप्लाई ले रहे थे।
यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि हमारी आतंक-रोधी एजेंसियाँ और सुरक्षा बल हर दिन देश को अनगिनत हमलों से बचा रहे हैं।
उनका काम गोलकीपर जैसा है — लोग तब देखते हैं जब कोई ‘गोल’ हो जाए, लेकिन वो हर दिन ऐसे सैकड़ों ‘गोल’ रोकते हैं।
पिछले कुछ वर्षों में न जाने कितनी साजिशें समय रहते नाकाम कर दी गईं।
देश में आज जो शांति है, वह हमारे सुरक्षाकर्मियों की चौकसी और समर्पण की वजह से ही है।
देश की सुरक्षा एजेंसियों और वीर जवानों को सलाम।
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