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छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: ED ने IAS निरंजन दास समेत 31 आबकारी अधिकारियों की 38.21 करोड़ की संपत्ति कुर्क की

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तत्कालीन आबकारी आयुक्त आईएएस निरंजन दास सहित 31 आबकारी अधिकारियों की कुल 38.21 करोड़ रुपये मूल्य की चल और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत की गई है। ईडी का कहना है कि इस घोटाले के कारण राज्य सरकार को अब तक 2,800 करोड़ रुपये से अधिक के राजस्व का नुकसान हुआ है और जांच आगे बढ़ने के साथ यह आंकड़ा और बढ़ सकता है।

ईडी की जांच में सामने आया है कि कुल 275 संपत्तियां एजेंसी के रडार पर थीं, जिनमें 78 अचल और 197 चल संपत्तियां शामिल हैं। कुर्क की गई अचल संपत्तियों की अनुमानित कीमत 21.64 करोड़ रुपये है, जिनमें आलीशान बंगले, पॉश रिहायशी कॉलोनियों के फ्लैट, व्यावसायिक दुकानें और बड़ी मात्रा में कृषि भूमि शामिल है। वहीं 16.56 करोड़ रुपये की चल संपत्तियों में बैंक खातों में जमा धनराशि, फिक्स्ड डिपॉजिट, जीवन बीमा पॉलिसियां, इक्विटी शेयर और म्यूचुअल फंड में किए गए निवेश पाए गए हैं।

प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार जांच में यह भी उजागर हुआ है कि आबकारी विभाग के भीतर एक संगठित आपराधिक सिंडिकेट सक्रिय था, जिसे वरिष्ठ अधिकारियों और राजनीतिक संरक्षण प्राप्त व्यक्तियों का समर्थन हासिल था। तत्कालीन आबकारी आयुक्त निरंजन दास और तत्कालीन सीईओ अरुण पति त्रिपाठी पर आरोप है कि उन्होंने मिलकर एक समानांतर आबकारी व्यवस्था खड़ी की, जिसके जरिए सरकारी नियमों को दरकिनार कर बड़े पैमाने पर अवैध कमाई की गई।

जांच एजेंसी का दावा है कि सरकारी शराब दुकानों के माध्यम से ‘पार्ट-बी’ योजना के तहत अवैध देसी शराब का निर्माण और बिक्री कराई गई। इस दौरान नकली होलोग्राम और गैर-कानूनी बोतलों का इस्तेमाल किया गया तथा सरकारी गोदामों को बायपास कर सीधे भट्टियों से दुकानों तक शराब की सप्लाई की गई। यह पूरा तंत्र आबकारी अधिकारियों की मिलीभगत से संचालित किया जा रहा था।

ईडी की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इस अवैध व्यवस्था के तहत प्रति शराब केस 140 रुपये का कमीशन तय किया गया था। अकेले आईएएस निरंजन दास ने करीब 18 करोड़ रुपये की अपराध से अर्जित आय हासिल की, जबकि सभी 31 आबकारी अधिकारियों द्वारा कुल मिलाकर लगभग 89.56 करोड़ रुपये की अवैध कमाई किए जाने का अनुमान है। ईडी ने संकेत दिए हैं कि मामले में जांच जारी है और आने वाले समय में और संपत्तियों की कुर्की तथा नई गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।

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