नया साल भारत के लिए अब तक के सबसे व्यापक जनगणना अभियान की शुरुआत लेकर आएगा। वर्ष 2026 में होने वाली जनगणना दो चरणों में संपन्न की जाएगी। पहले चरण में मकानों का सूचीकरण और उनकी गणना की जाएगी, जबकि दूसरे चरण में देश की 135 करोड़ से अधिक आबादी की व्यक्तिगत गणना होगी।
इस विशाल अभियान को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए जनगणना कोड डायरेक्टरी तैयार की जा रही है। यह डायरेक्टरी करीब 30 लाख प्रगणकों और पर्यवेक्षकों को उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि जनगणना के दौरान उत्तरों को मानकीकृत और सटीक रूप से दर्ज किया जा सके। इसमें घर के मुखिया से संबंध, मातृभाषा व अन्य भाषाओं का ज्ञान, व्यवसाय, उद्योग या सेवा का प्रकार, जन्म स्थान या अंतिम निवास स्थान तथा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से जुड़े कोड शामिल होंगे।
मकान सूचीकरण के दौरान सभी भवनों, जनगणना मकानों और परिवारों की पहचान की जाएगी। इससे मानव बस्तियों की वास्तविक स्थिति, आवास की उपलब्धता और कमी से संबंधित सटीक आंकड़े सामने आएंगे। इन आंकड़ों के आधार पर आवासीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए प्रभावी नीतियां बनाने में मदद मिलेगी। साथ ही, मकान सूचीकरण के तहत बनाए गए ब्लॉकों का जनसंख्या आकार दूसरे चरण की जनगणना के लिए आधार बनेगा।
जनगणना के दूसरे चरण में प्रत्येक व्यक्ति का व्यक्तिगत विवरण एकत्र किया जाएगा। इसमें आयु, वैवाहिक स्थिति, धर्म, अनुसूचित जाति/जनजाति, मातृभाषा, शिक्षा स्तर, दिव्यांगता, आर्थिक गतिविधि, प्रवासन और महिलाओं के लिए प्रजनन से संबंधित जानकारी शामिल होगी। इसके लिए भी एक अलग कोड डायरेक्टरी तैयार की जाएगी, जिसमें वर्णनात्मक और गैर-संख्यात्मक उत्तरों के लिए संभावित विकल्प और उनके कोड निर्धारित होंगे।
सुरक्षित रखे जाएंगे जनगणना प्रपत्र
जनगणना पूरी होने के बाद सभी भरे हुए प्रपत्र सुरक्षित रखे जाएंगे। इनमें गणनाकर्ताओं द्वारा भरे गए और स्वयं-गणना के माध्यम से जमा किए गए दोनों प्रकार के फॉर्म शामिल होंगे। ये सभी दस्तावेज संबंधित राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के जनगणना संचालन निदेशक कार्यालय में संरक्षित किए जाएंगे। भारत के महारजिस्ट्रार के कार्यालय के सर्वर में संपूर्ण डेटा केवल एन्क्रिप्टेड रूप में संग्रहित किया जाएगा।
ऐसे सुनिश्चित होगी डेटा सुरक्षा
जनगणना से प्राप्त सभी आंकड़े भारत के महारजिस्ट्रार के कार्यालय के सुरक्षित सर्वर में संग्रहीत होंगे। डेटा संग्रह से लेकर ट्रांसमिशन और प्रोसेसिंग तक हर स्तर पर बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है। मोबाइल डिवाइस में डेटा सहेजने से पहले उसे तारीख और समय के साथ एन्क्रिप्ट किया जाएगा। सर्वर पर डेटा स्थानांतरित होने के बाद निर्धारित समय सीमा के पश्चात मोबाइल से डेटा स्वतः हटा दिया जाएगा। साथ ही, लॉग और एक्सेस कंट्रोल जैसी सुरक्षा व्यवस्थाओं के जरिए डेटा की कड़ी निगरानी और सुरक्षित रख-रखाव सुनिश्चित किया जाएगा।
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