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सेल–भिलाई के ब्लास्ट फर्नेस-8 ने रचा नया कीर्तिमान, 24 घंटे में 10,025 टन हॉट मेटल उत्पादन

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स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) के भिलाई इस्पात संयंत्र ने औद्योगिक उत्पादन के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि अपने नाम दर्ज की है। संयंत्र के ब्लास्ट फर्नेस-8 ‘महामाया’ ने एक ही दिन में 10,025 टन हॉट मेटल का उत्पादन कर अब तक का सर्वाधिक एक-दिवसीय रिकॉर्ड स्थापित किया है। इस उपलब्धि के साथ फर्नेस-8 ने अपने ही पूर्व रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए नया इतिहास रच दिया है।

इस ऐतिहासिक सफलता के उपलक्ष्य में ब्लास्ट फर्नेस-8 के सेंट्रल कंट्रोल रूम में एक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कार्यकारी कार्यपालक निदेशक (संकार्य) श्री तापस दासगुप्ता रहे। अपने संबोधन में उन्होंने इस रिकॉर्ड उत्पादन को विभिन्न विभागों के सामूहिक, सुनियोजित और सतत प्रयासों का परिणाम बताया।

श्री दासगुप्ता ने कहा कि कोक ओवन, सिंटर प्लांट, ओर हैंडलिंग प्लांट, रॉ मटेरियल विभाग, ऑक्सीजन प्लांट, इंस्ट्रूमेंटेशन, पावर ब्लोइंग स्टेशन, रेल एवं कोल लॉजिस्टिक्स, स्टील मेल्टिंग शॉप, ट्रांसपोर्टेशन एंड डिस्ट्रीब्यूशन तथा रॉ एनर्जी विभाग सहित सभी सहयोगी इकाइयों ने इस उपलब्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को बधाई देते हुए प्रतिदिन 10,000 टन हॉट मेटल उत्पादन को निरंतर बनाए रखने पर जोर दिया।

इस अवसर पर मुख्य महाप्रबंधक (ब्लास्ट फर्नेस) श्री मनोज कुमार ने भी ब्लास्ट फर्नेस-8 की पूरी टीम को बधाई दी और उत्पादन में आई इस सकारात्मक गति को भविष्य में भी बनाए रखने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में मुख्य महाप्रबंधक प्रभारी (सेवाएं) श्री तुषार कान्त, मुख्य महाप्रबंधक प्रभारी (मैटेरियल्स एंड यूटिलिटीज) श्री बिजय कुमार बेहेरा, मुख्य महाप्रबंधक (कोक ओवन) श्री तुलाराम बेहेरा, मुख्य महाप्रबंधक (मैकेनिकल) श्री प्रमोद कुमार, मुख्य महाप्रबंधक (रॉ एनर्जी) श्री प्रोसेनजीत दास, मुख्य महाप्रबंधक (पीपीसी) श्री प्रवीण राय भल्ला, मुख्य महाप्रबंधक (एसएमएस-3) श्री त्रिभुवन बैठा, मुख्य महाप्रबंधक (रेल एवं कोल लॉजिस्टिक्स) श्री राहुल श्रीवास्तव सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी एवं ब्लास्ट फर्नेस-8 की टीम के सदस्य बड़ी संख्या में मौजूद रहे।

यह उपलब्धि भिलाई इस्पात संयंत्र की तकनीकी क्षमता, संचालन दक्षता और मजबूत टीमवर्क को दर्शाती है तथा देश के इस्पात उत्पादन में सेल की भूमिका को और अधिक सशक्त बनाती है।

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