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छत्तीसगढ़ में खत्म हुई ब्रिटिश काल की गार्ड ऑफ ऑनर परंपरा

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रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने अंग्रेजों के शासनकाल से चली आ रही सलामी गारद (गार्ड ऑफ ऑनर) की परंपरा को समाप्त करने का निर्णय लिया है। गृह (सामान्य) विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, पुलिस बल की कार्य क्षमता बढ़ाने और उपनिवेशवादी सोच से जुड़ी औपचारिक प्रक्रियाओं को खत्म करने के उद्देश्य से यह अहम कदम उठाया गया है।

महानदी भवन, नवा रायपुर अटल नगर से 19 दिसंबर 2025 को जारी आदेश में कहा गया है कि राज्य के भीतर सामान्य दौरों, आगमन, प्रस्थान और निरीक्षण के दौरान अब मंत्रियों एवं वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को सलामी गारद नहीं दी जाएगी। इस निर्णय के तहत माननीय गृहमंत्री, अन्य सभी मंत्रीगण, पुलिस महानिदेशक सहित वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के जिला भ्रमण या निरीक्षण के समय दी जाने वाली सलामी व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है।

हालांकि, यह प्रतिबंध राष्ट्रीय और राजकीय समारोहों पर लागू नहीं होगा। गणतंत्र दिवस (26 जनवरी), स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त), शहीद पुलिस स्मृति दिवस (21 अक्टूबर), राष्ट्रीय एकता दिवस (31 अक्टूबर), राजकीय समारोहों तथा पुलिस दीक्षांत परेड जैसे अवसरों पर औपचारिक सलामी गारद पूर्ववत जारी रहेगी।

इसके अलावा, संवैधानिक पदों पर आसीन विशिष्ट व्यक्तियों एवं प्रोटोकॉल के अंतर्गत आने वाले अतिथियों के लिए सलामी गारद की व्यवस्था में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। उनके लिए यह परंपरा पूर्व की तरह जारी रहेगी।

यह आदेश सक्षम स्वीकृति के बाद तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। शासन के अनुसार, इस बदलाव से पुलिस बल का समय और संसाधन बचेंगे, जिससे वे कानून-व्यवस्था और जनसुरक्षा से जुड़े कार्यों पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकेंगे।

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