क्रिसमस से ठीक एक दिन पहले छत्तीसगढ़ में सर्व समाज द्वारा आहूत राज्यव्यापी बंद का असर साफ तौर पर देखने को मिल रहा है। कांकेर जिले के आमाबेड़ा क्षेत्र में हुई हिंसा और कथित धर्मांतरण के विरोध में बुलाए गए इस बंद के चलते राजधानी रायपुर सहित कई जिलों में सुबह से ही बाजार, दुकानें और स्कूल नहीं खुले।
रायपुर में अधिकांश व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद नजर आए, वहीं निजी संस्थानों में भी कामकाज प्रभावित रहा। हालांकि, अस्पताल, मेडिकल स्टोर और एम्बुलेंस जैसी आपात सेवाओं को बंद से अलग रखा गया है।

कई संगठनों का समर्थन, पूरे प्रदेश में असर
इस छत्तीसगढ़ बंद को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS), छत्तीसगढ़ चैंबर ऑफ कॉमर्स सहित दर्जनों सामाजिक, धार्मिक और व्यापारी संगठनों का समर्थन प्राप्त है। आयोजकों का दावा है कि बंद का प्रभाव राज्य के अधिकांश जिलों में देखने को मिलेगा।

आमाबेड़ा हिंसा पर उबाल, प्रशासन की भूमिका पर सवाल
बंद से एक दिन पहले रायपुर प्रेस क्लब में आयोजित संयुक्त प्रेस वार्ता में समाज प्रमुखों ने सरकार और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि 15 से 18 दिसंबर के बीच आमाबेड़ा में हुई हिंसक घटनाओं में हिंदू जनजातीय समाज को निशाना बनाया गया, लेकिन प्रशासन ने निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की।

पुलिस-प्रशासन पर पक्षपात का आरोप
प्रेस वार्ता के दौरान समाज प्रतिनिधियों ने पुलिस और प्रशासन पर एकतरफा कार्रवाई करने के आरोप लगाए। साथ ही, कथित ईसाई धर्मांतरण को सामाजिक सौहार्द के लिए खतरा बताते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की गई। समाज प्रमुखों ने ऐलान किया कि हर जिले में बैठकें कर जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा जाएगा।

सरकार के सामने रखी गईं 5 प्रमुख मांगें
सर्व समाज ने आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी देते हुए सरकार के सामने पांच अहम मांगें रखीं—
- धर्म स्वातंत्र्य कानून को सख्ती से लागू किया जाए।
- कांकेर एसपी इंदिरा कल्याण एलेसेला को निलंबित कर उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
- SDM ए.एस. पैकरा और तहसीलदार सुधीर खलखो पर कार्रवाई की जाए।
- आमाबेड़ा हिंसा में कथित रूप से शामिल भीम आर्मी और अन्य संगठनों पर कड़ी कार्रवाई हो।
- ग्रामीणों पर दर्ज कथित पक्षपातपूर्ण मामलों को वापस लेकर पीड़ितों को मुआवजा दिया जाए।
आंदोलन की कमान संभाल रहे समाज प्रमुख
इस आंदोलन का नेतृत्व कई समाज संगठनों के प्रतिनिधि कर रहे हैं। प्रेस वार्ता में खेड़िस राम कश्यप, उमेश कच्छप, बंशीलाल कुर्रे, प्रदीप साहू, कृष्ण कुमार खेलकर सहित कलार, धीवर और नामदेव समाज के प्रतिनिधि शामिल रहे।
क्या खुला, क्या बंद
बंद रहेंगे:
- बाजार और दुकानें
- व्यापारिक प्रतिष्ठान
- अधिकांश निजी संस्थान
खुले रहेंगे:
- अस्पताल और मेडिकल स्टोर
- एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड और अन्य आपात सेवाएं
आमाबेड़ा में कैसे भड़की हिंसा
19 दिसंबर को कांकेर जिले के आमाबेड़ा क्षेत्र के बड़े तेवड़ा गांव में शव दफनाने को लेकर आदिवासी समाज और धर्मांतरित समुदाय के बीच विवाद हुआ, जो हिंसा में बदल गया। दोनों पक्षों के बीच मारपीट हुई, जिसके बाद हालात बेकाबू हो गए।
गुस्साए ग्रामीणों ने सरपंच के घर में तोड़फोड़ की और गांव के चर्च में आग लगा दी। इसके बाद करीब तीन हजार लोगों की भीड़ आमाबेड़ा पहुंची, जहां एक और चर्च को आग के हवाले कर दिया गया।
स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया। इस दौरान कई ग्रामीण, कुछ पत्रकार और ASP अंतागढ़ आशीष बंछोर समेत करीब 20 पुलिसकर्मी घायल हुए।
शव दफनाने से शुरू हुआ विवाद
विवाद की जड़ गांव के सरपंच रजमन सलाम के पिता चमरा राम की मृत्यु के बाद उनका शव गांव में ही दफनाया जाना बताया जा रहा है। सरपंच परिवार के धर्म परिवर्तन को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी थी। दो दिनों तक चले विरोध प्रदर्शन के बाद प्रशासन ने भारी सुरक्षा के बीच शव को कब्र से बाहर निकलवाया।
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