महासमुंद। छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा जप्ती मामले में छत्तीसगढ़ संयुक्त किसान मोर्चा को न्यायिक राहत मिली है। सीजेएम न्यायालय महासमुंद ने तुमगांव थाना में जप्त छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा को सुपुर्दनामा पर सौंपने का आदेश दिया है। इस संबंध में छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण संग्राम सेनानी और किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष अनिल दुबे द्वारा 10 हजार रुपये के इस्तगासा पर सुपुर्दनामा आवेदन प्रस्तुत किया गया है।
अवैध करणी कृपा पावर प्राइवेट लिमिटेड एवं अवैध नूतन आयरन एंड पावर प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ पिछले पौने चार वर्षों से आंदोलन कर रहे किसान नेताओं ने कहा कि यह आदेश किसान संघर्ष की बड़ी जीत है। आंदोलन में प्रमुख रूप से अनिल दुबे, छन्नूलाल साहू, नंदकुमार साहू, बृजबिहारी साहू, अशोक कश्यप, परसराम ध्रुव, नाथूराम सिन्हा, बलराम साहू, लीलाधर पटेल, तोषण सिन्हा, अवध साहू, रुपसिंग निषाद, दीनदयाल साहू, धर्मेंद्र यादव, दौलत ध्रुव, उदय चंद्राकर, करण साहू, विसरु ध्रुव, डेविड चंद्राकर, दयाराम ध्रुव, बैशाखु सिन्हा, भोला साहू, कुंजलाल चेलक, टिकेलाल जलक्षत्री, गेंदलाल जांगड़े, रामनाथ ढीढी, अगरसिंह दिवान, बेनीराम पटेल, अमजद खान और घनश्याम पटेल सक्रिय रूप से शामिल रहे।
किसान मोर्चा ने घोषणा की है कि न्यायालय से सुपुर्दनामा आदेश प्राप्त होते ही न्यायालय परिसर में लड्डू बांटे जाएंगे। इसके बाद सत्याग्रही किसान कलश यात्रा, बैंड-बाजा, आतिशबाजी, पूजा-अर्चना एवं शुभ मुहूर्त में तुमगांव थाना जाकर छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा को सम्मानपूर्वक प्राप्त करेंगे।
छत्तीसगढ़ संयुक्त किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष अनिल दुबे ने आरोप लगाया कि माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अवैध कारखानों पर कार्रवाई के स्पष्ट निर्देश दिए जाने के बावजूद जिला प्रशासन ने आदेशों का पालन नहीं किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा को जप्त करना प्रदेश की अस्मिता के साथ खिलवाड़ है और यह सरकार के लिए राजनीतिक नुकसान का कारण बनेगा।
किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि जिलाधीश महासमुंद विनय कुमार लंगेह द्वारा उच्च न्यायालय के आदेशों की अवहेलना की गई। उन्होंने दावा किया कि अवैध करणी कृपा पावर प्राइवेट लिमिटेड को लाभ पहुंचाने के लिए प्रशासनिक मशीनरी का दुरुपयोग हुआ, जिसमें कंपनी के जेसीबी, निजी गार्ड, एसडीओपी अजय त्रिपाठी, तहसीलदार जुगल किशोर पटेल, मोहित कुमार अमिला, तुमगांव थाना प्रभारी मानसिंह भदौरिया एवं टीकाराम सारथी की भूमिका रही।
किसान मोर्चा ने यह भी स्मरण कराया कि 8 अगस्त 2024 को शासन को शपथ पत्र देकर लगभग 40 एकड़ शासकीय भूमि, काबिल-कास्त भूमि, वन भूमि, सिंचाई विभाग की भूमि, आदिवासी भूमि, राष्ट्रीय राजमार्ग की भूमि एवं किसानों की भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त कराने की मांग की गई थी। तुमगांव तहसील न्यायालय में चले प्रकरण में सत्याग्रही किसानों की बातें सही पाई गईं, इसके बावजूद प्रशासन द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
किसान मोर्चा ने घोषणा की है कि छत्तीसगढ़ महतारी अस्मिता यात्रा राज्य के गांव-गांव जाकर किसानों के अधिकार, जल-जंगल-जमीन और राज्य की अस्मिता की रक्षा का संदेश देगी।
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