बिहार की राजनीति में उस वक्त हलचल मच गई जब बक्सर से विधायक और पूर्व आईपीएस अधिकारी आनंद मिश्रा ने अपनी ही पार्टी की सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने सार्वजनिक मंच से कहा कि राज्य का स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से भ्रष्टाचार की गिरफ्त में है और यह आम जनता के साथ खुला धोखा है।
आनंद मिश्रा ने कहा कि जिन विभागों पर लोगों की जान बचाने की जिम्मेदारी है, वही विभाग आज भ्रष्टाचार का केंद्र बन चुके हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब हालात इतने खराब हैं, तो क्या स्वास्थ्य मंत्री इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेंगे?
पूर्व आईपीएस अधिकारी होने के नाते आनंद मिश्रा के बयान को हल्के में नहीं लिया जा सकता। उनका कहना है कि सिस्टम के भीतर संगठित तरीके से भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिसका खामियाजा आम मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
विधायक के इस बयान के बाद यह बहस तेज हो गई है कि क्या बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था सच में वेंटिलेटर पर है? सरकारी अस्पतालों की बदहाली, दवाइयों की कमी और अव्यवस्थाओं को लेकर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं, लेकिन अब सत्ताधारी दल के विधायक द्वारा लगाए गए आरोपों ने सरकार की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
अब देखना होगा कि सरकार और स्वास्थ्य मंत्री इन आरोपों पर क्या रुख अपनाते हैं या फिर यह मामला भी अन्य मुद्दों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।
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