महासमुंद। अवैध औद्योगिक गतिविधियों और कथित प्रशासनिक संरक्षण के खिलाफ छत्तीसगढ़ के किसान अब आर-पार की लड़ाई के मूड में नजर आ रहे हैं। छत्तीसगढ़ संयुक्त किसान मोर्चा ने करणी कृपा पावर प्राइवेट लिमिटेड पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि कंपनी से फैल रहे प्रदूषण के कारण किसानों की धान की फसल पूरी तरह नष्ट हो गई है।
किसान मोर्चा का आरोप है कि इस संबंध में दर्जनों बार प्रमाण सहित शिकायतें की गईं, लेकिन प्रशासन ने न केवल आंखें मूंद लीं बल्कि माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों की भी कथित तौर पर अवहेलना की गई। इसी के विरोध में किसान मोर्चा ने 16 दिसंबर को ट्रैक्टरों में नष्ट धान भरकर महासमुंद कलेक्टर कार्यालय तक मार्च करने का ऐलान किया है।
मोर्चा के नेताओं का कहना है कि शासकीय भूमि, काबिल कास्त जमीन, सिंचाई विभाग, वन भूमि, राष्ट्रीय राजमार्ग और आदिवासी भूमि पर कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर अवैध उद्योग संचालित किए जा रहे हैं। आरोप लगाया गया है कि यह सब कुछ भ्रष्ट प्रशासनिक तंत्र की मिलीभगत से संभव हो पा रहा है।
किसान मोर्चा ने छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा हटाए जाने को राज्य की अस्मिता पर हमला बताया है। संगठन का आरोप है कि बिना किसी वैध न्यायालयीन आदेश के महज चार घंटे के भीतर प्रतिमा को हटाया गया, जो न केवल अनैतिक है बल्कि जनभावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला कृत्य भी है।
मोर्चा ने चेतावनी दी है कि यदि किसानों की मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आंदोलन विधानसभा से लेकर पूरे राज्य में फैलाया जाएगा। संगठन का दावा है कि अवैध शराब के बाद अब अवैध उद्योगों को राजनीतिक संरक्षण दिया जा रहा है।
16 दिसंबर को दोपहर 12 बजे सभी किसान महासमुंद के लोहिया चौक पर एकत्र होंगे, जिसके बाद कलेक्टर कार्यालय की ओर पैदल व ट्रैक्टर मार्च किया जाएगा। इस आंदोलन का नेतृत्व किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष अनिल दुबे सहित कई वरिष्ठ किसान नेता करेंगे।
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