मध्यप्रदेश सरकार ने विवादों में घिरे IAS संतोष कुमार वर्मा पर कड़ा कदम उठाते हुए उनकी सेवा समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने देर रात हुई उच्चस्तरीय बैठक में वर्मा को तत्काल कृषि विभाग से हटाकर GAD पूल में अटैच करने और केंद्र सरकार को उनकी बर्खास्तगी का प्रस्ताव भेजने का निर्देश दिया।
क्यों बढ़ी IAS वर्मा पर कार्रवाई की तल्खी?
सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) की जांच रिपोर्ट में पाया गया कि संतोष वर्मा ने फर्जी और जाली दस्तावेजों के आधार पर IAS प्रमोशन लिया था। उनके खिलाफ कई आपराधिक मामले भी अदालतों में लंबित हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्मा का स्पष्टीकरण असंतोषजनक रहा, और अधिकारी को सेवा में बनाए रखना अनुशासन और कानून व्यवस्था के हित में नहीं है। सरकार जल्द ही उन्हें चार्जशीट भी थमाने वाली है।
लगातार विवादों में रहे थे वर्मा
पिछले कुछ दिनों में संतोष वर्मा दो अलग-अलग बयानों को लेकर भारी विरोध का सामना कर रहे थे। राज्यभर में उनका पुतला दहन हुआ और समाज के कई संगठनों ने कार्रवाई की मांग बढ़ा दी।
1. ब्राह्मण बेटियों पर विवादित टिप्पणी
अजाक्स सम्मेलन में उन्होंने कहा था—
“जब तक मेरे बेटे को कोई ब्राह्मण अपनी बेटी दान नहीं देता, तब तक आरक्षण जारी रहना चाहिए।”
यह बयान सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक आक्रोश का कारण बना।
2. हाईकोर्ट पर गंभीर आरोप
एक अन्य वीडियो में उन्होंने कहा—
“एसटी वर्ग के बच्चों को सिविल जज हाईकोर्ट नहीं बनने दे रहा… कटऑफ जानबूझकर कम दिए जाते हैं।”
इन बयानों को लेकर समाज में जबर्दस्त नाराज़गी थी और सरकार पर कार्रवाई का दबाव बढ़ रहा था।
14 दिसंबर को होने वाला था सीएम हाउस घेराव
IAS संतोष वर्मा पर कार्रवाई न होने से क्षुब्ध ब्राह्मण समाज और सर्व समाज ने 14 दिसंबर को सीएम हाउस घेरने का फैसला किया था। कांग्रेस, बीजेपी और अन्य दलों के लोग भी इस विरोध के समर्थन में थे। इसके पहले भी प्रदेशभर में धरने, प्रदर्शन और पुतला दहन कार्यक्रम जारी थे।
सरकार के देर रात लिए गए फैसले को समाज में फैलते गुस्से और संभावित बड़े विरोध से जोड़कर देखा जा रहा है।
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