महासमुंद। छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा को पुलिस द्वारा जब्त किए जाने के खिलाफ संयुक्त किसान मोर्चा के अध्यक्ष अनिल दुबे (64) ने मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी, महासमुंद की अदालत में सुपुर्दनामा के लिए आवेदन प्रस्तुत किया है। यह आवेदन भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 497/503 के तहत दिया गया है।
मामला उस समय सामने आया जब तुमगांव पुलिस ने अपराध क्रमांक 234/2025 में भारतीय न्याय संहिता की धारा 285, 3(5) और राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम 1956 के तहत कार्रवाई करते हुए छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा को जब्त कर आरक्षी केंद्र के कब्जे में रखा था।


प्रतिमा विवेचना का हिस्सा नहीं : दुबे
अनिल दुबे ने अपने आवेदन में कहा है कि छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा न तो अपराध का हिस्सा है और न ही किसी प्रकार से विवेचना की विषय-वस्तु। इसके बावजूद पुलिस ने प्रतिमा को अकारण कब्जे में लेकर जब्त किया है, जिससे जनभावनाओं और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंच रही है।
उन्होंने कहा कि प्रतिमा छत्तीसगढ़ की अस्मिता और आस्था का प्रतीक है। पुलिस थाने में रखे जाने से उसके क्षतिग्रस्त होने का खतरा है, जो प्रतिमा की गरिमा और सम्मान के विपरीत है।
“जरूरत पड़े तो जांच में प्रस्तुत कर देंगे”
दुबे ने अदालत को विश्वास दिलाया कि यदि जांच में कभी आवश्यकता पड़ती है तो वे प्रतिमा को सम्मानपूर्वक उपलब्ध कराएंगे। उन्होंने यह भी बताया कि प्रतिमा किसान मोर्चा के नाम से विधिवत खरीदी गई है, इसलिए वह इसे सुपुर्दनामा में प्राप्त करने के अधिकारी हैं।
उन्होंने आश्वस्त किया कि उन्हें सुपुर्दनामा में प्रतिमा मिलने के बाद इसके मूल स्वरूप में कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा न ही इसे बेचा जाएगा।
अदालत से प्रतिमा लौटाने की मांग
आवेदन में अदालत से अनुरोध किया गया है कि छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा को सम्मानपूर्वक आवेदक को सुपुर्दनामा में देने का आदेश जारी किया जाए। अदालत आवेदन पर आगे सुनवाई करेगी।
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