छत्तीसगढ़ में चल रही SIR (Special Integrated Revision) प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस ने एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। धान कटाई, मजदूरी बंद और बड़े पैमाने पर पलायन को प्रमुख कारण बताते हुए पार्टी ने आज निर्वाचन आयोग के समक्ष 7 दिन नहीं, पूरे 3 महीने का अतिरिक्त समय मांगा।
कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल—वरिष्ठ नेता सत्यनारायण शर्मा, पूर्व विधायक विकास उपाध्याय और रायपुर ग्रामीण के जिलाध्यक्ष कुमार मेनन—ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त से मुलाकात कर कहा कि मौजूदा हालात में लोगों के लिए SIR प्रक्रिया में भाग लेना मुश्किल हो रहा है।
पलायन और खेतों में व्यस्त ग्रामीण
कांग्रेस नेताओं ने आयोग को बताया कि मनरेगा के काम ठप होने से बिलासपुर, मुंगेली, जांजगीर-चांपा, जशपुर और बस्तर समेत कई जिलों के लोग रोज़गार की तलाश में राज्य से बाहर जा चुके हैं।
ऐसे लोगों के वापस लौटने और जरूरी दस्तावेज़ जुटाने में वक़्त लगेगा।
सत्यनारायण शर्मा ने यह भी कहा कि बस्तर के करीब 600 नक्सल प्रभावित गांवों के लोग तो कई साल पहले ही अपने गांव छोड़कर तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में बस गए हैं। इतने कम समय में इन लोगों तक पहुँचना और प्रक्रिया पूरी करना बिल्कुल अव्यवहारिक है।
“50% से कम फॉर्म जमा, 97% का दावा भ्रमित करने वाला”
पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने बताया कि SIR शुरू हुए 26 दिन बीत चुके हैं, लेकिन आधे से कम लोग ही फॉर्म जमा कर पाए हैं।
उन्होंने आयोग के उस दावे पर भी सवाल उठाया कि 97% फॉर्म जमा हो चुके हैं।
कांग्रेस के मुताबिक, “अनेक घरों तक फॉर्म पहुँचे ही नहीं, ऐसे में इतनी ऊँची प्रतिशतता कैसे संभव है?”
“चुनाव में 3 साल बाकी… इतनी जल्दबाज़ी क्यों?”
कांग्रेस ने कहा कि विधानसभा चुनाव में अभी लंबा समय है, इसलिए मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण को सिर्फ एक महीने में निपटाने की जल्दबाज़ी समझ से परे है।
अगर समयावधि को बढ़ाकर 3 महीने किया जाए, तो
- ग्रामीणों को दस्तावेज़ जुटाने की सुविधा मिलेगी,
- पलायन कर चुके लोग लौट पाएंगे, और
- मतदाता सूची भी कहीं ज़्यादा सटीक और विश्वसनीय तैयार हो सकेगी।
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