दिल्ली की सेशन कोर्ट ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी के फाउंडर जवाद अहमद सिद्दीकी को 13 दिन की ED कस्टडी में भेज दिया है। प्रवर्तन निदेशालय ने मंगलवार शाम उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक अधिनियम (PMLA) के तहत गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद सिद्दीकी को एडिशनल सेशन जज शीतल चौधरी प्रधान के सामने पेश किया गया, जहां कोर्ट ने एजेंसी की मांग मानते हुए उन्हें रिमांड पर भेज दिया।
ED की जांच के अनुसार, यूनिवर्सिटी पर आरोप है कि उसने UGC और NAAC मान्यता को लेकर झूठे दावे किए और गलत तरीके से रेटिंग दिखाकर छात्रों, अभिभावकों और हितधारकों को गुमराह किया। FIR में भी दर्ज है कि यूनिवर्सिटी ने UGC अधिनियम 1956 की धारा 12(B) के तहत गलत तरीके से मान्यता प्राप्त होने का दावा किया था, जबकि UGC ने स्पष्ट किया था कि अल-फलाह सिर्फ एक स्टेट प्राइवेट यूनिवर्सिटी है और उसने 12(B) के तहत कभी आवेदन नहीं किया, न ही वह अनुदान के लिए पात्र है।
NAAC रेटिंग के मामलों में भी गलत जानकारी पेश करने का आरोप है। ED का कहना है कि यूनिवर्सिटी और ट्रस्ट ने अवैध गतिविधियों के जरिए फंड जुटाए, जिनके स्रोत संदिग्ध पाए गए हैं।जांच में यह भी सामने आया कि दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच द्वारा दर्ज दो FIR के आधार पर ही ED ने मनी ट्रेल की जांच शुरू की। आरोप था कि फरीदाबाद के धौज गांव में स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी ने झूठे दावों के माध्यम से बड़े पैमाने पर फायदा कमाया।
अल-फलाह यूनिवर्सिटी की स्थापना 2014 में हरियाणा विधानसभा के एक्ट के जरिए की गई थी और 2015 में इसे UGC से प्राइवेट यूनिवर्सिटी का दर्जा मिला। यूनिवर्सिटी को अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट संचालित करता है, जिसकी स्थापना 1995 में हुई थी। ED का दावा है कि ट्रस्ट ने आपराधिक नेटवर्क के जरिए बड़े पैमाने पर फंड जुटाए।
यूनिवर्सिटी की वेबसाइट के अनुसार, पहले कैंपस में 9 विभाग/कॉलेज थे, जबकि ED की कार्रवाई के बाद यह संख्या घटकर 5 रह गई है। अल-फलाह समूह के तहत एक 650 बेड का मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल भी चलता है, जिसे आसपास के जिलों के लिए बड़ी स्वास्थ्य सुविधा माना जाता है।
ED के अनुसार, सिद्दीकी के खिलाफ जांच जारी रहेगी और कस्टडी अवधि में एजेंसी उनसे फंड की उत्पत्ति, ट्रस्ट की वित्तीय गतिविधियों और गलत मान्यता से जुड़े दस्तावेजों की जानकारी जुटाएगी।
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