प्रशासनिक और वित्तीय प्राथमिकताओं पर सवाल
छत्तीसगढ़ की विष्णु देव साय सरकार एक बार फिर अपने प्रशासनिक प्रबंधन और वित्तीय प्राथमिकताओं को लेकर सवालों के घेरे में है। लोक निर्माण विभाग (PWD) की प्रेस विज्ञप्ति से मिली जानकारी के अनुसार, सरकारी कार्यक्रमों पर भारी खर्च किए जाने के बावजूद, निर्माण कार्य पूरे करने वाले ठेकेदारों को उनके भुगतान के लिए तरसना पड़ रहा है।
बेमेतरा में करोड़ों का खर्च
PWD की रिपोर्ट के अनुसार, सिर्फ बेमेतरा जिले में मुख्यमंत्री और मंत्रियों के 17 कार्यक्रमों के लिए टेंट, माइक और लाइट जैसी अस्थायी व्यवस्थाओं पर ₹3,49,13,180 (तीन करोड़ उनचास लाख तेरह हजार एक सौ अस्सी रुपये) खर्च किए गए।
इतनी बड़ी राशि का उपयोग केवल आयोजन संबंधी कार्यों में होना, राजकोष के विवेकपूर्ण उपयोग पर सवाल खड़ा करता है — खासकर तब, जब विकास कार्यों के भुगतान लंबित हों।
ठेकेदारों को नहीं मिला भुगतान
PWD के कई निर्माण कार्य पूरे होने के बावजूद, ठेकेदारों को भुगतान नहीं किया जा रहा है। इससे न केवल ठेकेदारों की वित्तीय स्थिति बिगड़ रही है बल्कि राज्य के आधारभूत संरचना विकास पर भी असर पड़ रहा है।
कई ठेकेदारों ने विभाग पर आरोप लगाया है कि वे महीनों से भुगतान की प्रतीक्षा में हैं, जबकि सरकार प्रचार और दौरों में व्यस्त है।
भुगतान या प्रचार — प्राथमिकता क्या?
| भुगतान (ज़रूरी) | दौरे (ख़र्चीले) |
|---|---|
| निर्माण कार्य पूरा करने वाले ठेकेदारों को समय पर भुगतान | मुख्यमंत्री और मंत्रियों के कार्यक्रम, टेंट-माइक पर भारी खर्च |
| विकास कार्यों की निरंतरता और वित्तीय अनुशासन | राजनीतिक छवि निर्माण, पर जनता के पैसों की बर्बादी का आरोप |
PWD प्रमुख अभियंता पर आरोप
PWD के प्रमुख अभियंता पर यह आरोप लगाया गया है कि वे मंत्री की ‘सेवा’ में लगे रहते हैं और विभागीय भुगतान की उपेक्षा कर रहे हैं।
आलोचकों का कहना है कि प्रशासनिक अधिकारी राजनीतिक कार्यक्रमों की तैयारियों में अधिक व्यस्त हैं, जिससे विभागीय पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन पर असर पड़ रहा है।
विष्णु देव साय के सुशासन पर सवाल
विष्णु देव साय की सरकार पर ‘सुशासन’ का दावा करने के बावजूद, यह स्थिति प्रशासनिक विफलता को दर्शाती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक ठेकेदारों के भुगतान को प्राथमिकता नहीं दी जाती, तब तक राज्य में वित्तीय स्थिरता और विकास परियोजनाओं की विश्वसनीयता पर संकट बना रहेगा।
राज्य की वित्तीय व्यवस्था तब मजबूत मानी जाती है जब सरकार अपने उत्पादक कार्यों को प्राथमिकता देती है। लेकिन वर्तमान हालातों में, विष्णु देव साय सरकार की प्राथमिकताएँ जनहित के बजाय राजनीतिक प्रचार पर केंद्रित दिखाई दे रही हैं — जिससे यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या यह सुशासन है या सिर्फ़ सियासी शो-ऑफ?
Leave a comment