चोर चोरी से जाए सीनाजोरी से नहीं।
बिहार में 62 हजार करोड़ रुपये के बिजलीघर घोटाले का मामला गर्मा गया है। आरोप है कि इस घोटाले में अडानी ग्रुप की मिलीभगत है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी पूर्व ऊर्जा मंत्री आर.के. सिंह पर प्रभाव डालने की कोशिश कर रही है, लेकिन आर.के. सिंह ने साफ कहा है कि वे सच और पारदर्शिता के पक्ष में खड़े हैं।
जानकारी के अनुसार, देशभर में नए बिजलीघरों के नाम पर बड़े आर्थिक घोटालों का जाल फैलाया जा रहा है। बिहार के पीरपैंती बिजलीघर का मामला केवल 62 हजार करोड़ का नहीं, बल्कि इससे जुड़े कई और वित्तीय अनियमितताओं की परतें खुलने लगी हैं।
बताया जा रहा है कि अडानी ग्रुप यह बिजलीघर कौड़ियों के दाम पर खरीदने की तैयारी में है, क्योंकि इसके ठीक बगल में एनटीपीसी कहलगांव परियोजना स्थित है। इससे उन्हें कोल लिंकेज, ऐश डैम और अन्य संसाधन पहले से उपलब्ध मिल जाएंगे।
लेकिन सवाल यह उठता है कि आखिर क्यों सरकारी संपत्तियों को इतनी सस्ती कीमतों पर बेचा जा रहा है?
इस पूरे मामले ने राजनीतिक और आर्थिक हलकों में हलचल मचा दी है। जनता जानना चाहती है कि आखिर इन सौदों के पीछे सच्चाई क्या है और कौन इस खेल का असली मास्टरमाइंड है।
शर्म की बात है कि भ्रष्टाचार खत्म होने का नाम नहीं ले रहा।
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