बागेश्वर धाम सरकार धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के पावन सान्निध्य में आज ‘सनातन एकता पदयात्रा 2.0’ का शुभारंभ हुआ। आरंभ में हुए शंखनाद ने पूरे वातावरण को धार्मिक ऊर्जा और उत्साह से भर दिया।
कार्यक्रम स्थल पर देशभर से आए संत-महात्मा, वेदपाठी ब्राह्मण और धर्मगुरुओं ने अपनी उपस्थिति से इस आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया। श्रद्धालुओं की अपार भीड़ ने “जय श्रीराम” और “हर हर महादेव” के उद्घोष से पूरा परिसर गुंजा दिया।

बागेश्वर धाम सरकार का आशीर्वचन
मुख्य आकर्षण रहे पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, जिन्होंने अपने ओजस्वी संबोधन में कहा —
“सनातन धर्म केवल पूजा-पाठ नहीं, बल्कि भारत की आत्मा है। आज जब हमारी परंपरा पर प्रश्न उठ रहे हैं, तब हर सनातनी को धर्म, संस्कृति और राष्ट्र की रक्षा के लिए एकजुट होना होगा।”
उनके आशीर्वचन से श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। भक्तों ने पुष्पवृष्टि कर बाबा का स्वागत किया और पूरे परिसर में “जय सनातन, जय भारत” के नारे गूंज उठे।

पदयात्रा में उमड़ा जनसैलाब
- ‘सनातन एकता पदयात्रा 2.0’ में शामिल भक्तों का उत्साह देखने लायक था।
- भगवा ध्वज लहराते हुए हजारों लोगों ने एक स्वर में कहा — “हम सब एक हैं, सनातन अखंड है।”
- महिलाओं, युवाओं और बच्चों की सक्रिय भागीदारी ने यह संदेश दिया कि सनातन की नई पीढ़ी भी पूरी शक्ति से जाग चुकी है।
- जगह-जगह भक्ति संगीत, भजन और सत्संग के आयोजन हुए, जिनसे पूरा वातावरण भक्तिमय बन गया।
आध्यात्मिक एकता का प्रतीक
यह पदयात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक एकता और सनातन चेतना का प्रतीक बन चुकी है।
संतों और विद्वानों ने एक स्वर में कहा —
“जब तक इस भूमि पर शंखनाद गूंजता रहेगा, सनातन धर्म अमर रहेगा।”
‘सनातन एकता पदयात्रा 2.0’ ने यह साबित कर दिया कि सनातन केवल एक आस्था नहीं, बल्कि भारत की आत्मा है।
बागेश्वर धाम सरकार धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के नेतृत्व में यह यात्रा धर्म, संस्कृति और एकता के पुनर्जागरण का संदेश लेकर आगे बढ़ रही है।
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