जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर (पीके) ने दावा किया है कि इस बार बिहार में जनता ने बदलाव का मन बना लिया है। उन्होंने कहा कि 2025 के विधानसभा चुनाव में बिहार की 60% से अधिक जनता परिवर्तन चाहती है और जन सुराज को एक मजबूत राजनीतिक विकल्प के रूप में देख रही है।
गया में मीडिया से बातचीत के दौरान पीके ने कहा, “इतना बड़ा मतदान यह दर्शाता है कि बिहार के लोग बदलाव के लिए वोट कर रहे हैं। आजादी के बाद पहली बार राज्य में इतने बड़े पैमाने पर लोगों ने लोकतंत्र के इस पर्व में भाग लिया है।”
उन्होंने आगे कहा कि प्रवासी मजदूर इस बार चुनाव के “गेम चेंजर” साबित हुए हैं। “छठ पूजा के बाद जो प्रवासी मजदूर बिहार में रुके रहे, उन्होंने न सिर्फ खुद मतदान किया बल्कि अपने परिजनों को भी वोट डालने के लिए प्रेरित किया। इस बार प्रवासी मजदूरों की भूमिका पहले से कहीं ज्यादा अहम रही है।”
पीके ने कहा, “14 नवंबर बिहार के इतिहास में दर्ज होने जा रहा है, क्योंकि जनता ने इस बार भय की राजनीति को नकार कर उम्मीद की राजनीति को चुना है। दो करोड़ से अधिक लोगों ने मतदान किया, यह इस बात का संकेत है कि अब बिहार के लोग डर के बजाय बदलाव चाहते हैं।”
राजनीतिक हमला करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा, “नीतीश कुमार और लालू यादव की राजनीति का डर अब खत्म हो चुका है। जनता अब यह तय कर रही है कि कौन उनके मुद्दों पर काम करेगा और कौन सिर्फ सत्ता के लिए राजनीति करेगा।”
उन्होंने एनडीए और राजद-कांग्रेस गठबंधन दोनों पर निशाना साधते हुए कहा, “बिहार में अब असली विकल्प जन सुराज के रूप में उभर चुका है। पहले जनता झेलती थी, अब नेता झेल रहे हैं।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान पर भी पीके ने तंज कसते हुए कहा, “वे कहते हैं कि राजद और कांग्रेस एक-दूसरे का बाल नोचेंगे, लेकिन बिहार की जनता ने दिखा दिया कि अब वे किसी की तरफ नहीं, बल्कि अपने भविष्य की तरफ देख रही है।”
अंत में उन्होंने कहा, “अब चुनाव सिर्फ सत्ता तय नहीं करेगा, बल्कि यह भी तय करेगा कि असली विपक्ष कौन होगा। जन सुराज की सबसे बड़ी जीत यही है कि उसने बिहार को एक ईमानदार विकल्प दिया है।”
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