छत्तीसगढ़ के शिक्षकों के लिए सोमवार का दिन बेहद अहम साबित हुआ। राज्य में शिक्षकों को क्रमोन्नत वेतनमान (Time-Bound Promotion / ACP / MACP समान लाभ) देने को लेकर अब अंतिम फैसला हाईकोर्ट करेगा। इस मुद्दे पर 25 वर्षों में पहली बार इतना बड़ा बंच केस तैयार हुआ है, जिसमें करीब 1020 मामलों को एक साथ क्लब कर सुनवाई शुरू की गई है। जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह आंकड़ा 1100 तक पहुंच सकता है।
राजधानी रायपुर से मिली जानकारी के अनुसार, यह सुनवाई हाईकोर्ट में डे-टू-डे (Day-to-Day) आधार पर की जा रही है। अदालत ने संकेत दिए हैं कि यह मामला तेजी से निपटाया जाएगा ताकि लाखों शिक्षकों को उनके हक का लाभ जल्द मिल सके। यह केस इसलिए भी ऐतिहासिक माना जा रहा है क्योंकि राज्य के इतिहास में पहली बार किसी एक ही विषय पर इतनी बड़ी संख्या में याचिकाएं दाखिल की गई हैं।
इन याचिकाओं का आधार ‘सोना साहू क्रमानुन्नति केस’ को बनाया गया है। इस मामले में पहले ही कुछ शिक्षकों को लाभ मिल चुका है, जिसके बाद बाकी शिक्षकों ने भी समान लाभ की मांग की है। अब अदालत यह तय करेगी कि यह आदेश अन्य शिक्षकों पर भी लागू होगा या नहीं।
हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से तीन महत्वपूर्ण सवालों के स्पष्ट उत्तर मांगे हैं—
1. सोना साहू जजमेंट अन्य याचिकाकर्ताओं पर क्यों लागू होना चाहिए?
2. पंचायत विभाग के शिक्षकों को संवीलीयन (Merger) के बाद शिक्षा विभाग में लाए जाने पर इसका आधार क्या होगा?
3. क्रमोन्नति का लाभ नियुक्ति तिथि से मिलेगा या संवीलीयन तिथि से?
विशेषज्ञों के अनुसार, क्रमोन्नत वेतनमान एक प्रकार का समय-आधारित वित्तीय प्रमोशन है, जो उन कर्मचारियों को दिया जाता है जिन्हें लम्बे समय तक पदोन्नति नहीं मिलती। ऐसे कर्मचारियों को 8, 16, 24 या 30 वर्षों की सेवा के बाद वेतन वृद्धि का लाभ मिलता है।
हाईकोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले से छत्तीसगढ़ के हजारों शिक्षकों की उम्मीदें जुड़ी हुई हैं। यदि निर्णय उनके पक्ष में आता है, तो यह न केवल वित्तीय राहत देगा बल्कि वर्षों से चली आ रही पदोन्नति की प्रतीक्षा भी समाप्त कर देगा। यह सुनवाई अब प्रदेश के शिक्षा जगत में एक नए अध्याय की शुरुआत के रूप में देखी जा रही है।
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