Home छत्तीसगढ़ गरबा सिर्फ डांस नहीं, देवी की उपासना है: वक्फ बोर्ड ने मुस्लिम युवाओं से आयोजनों से दूर रहने की अपील की
छत्तीसगढ़धर्म

गरबा सिर्फ डांस नहीं, देवी की उपासना है: वक्फ बोर्ड ने मुस्लिम युवाओं से आयोजनों से दूर रहने की अपील की

Share
Share

रायपुर | नवरात्रि की तैयारियों के बीच छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड के चेयरमैन सलीम राज का बयान चर्चा में है। उन्होंने मुस्लिम युवाओं से अपील की है कि वे गरबा आयोजनों में शामिल न हों। सलीम राज ने कहा— “गरबा केवल नृत्य नहीं बल्कि आदिशक्ति की पूजा है। अगर किसी को मूर्ति पूजा में आस्था नहीं है तो उसे ऐसे धार्मिक आयोजनों से दूरी बनाकर रखनी चाहिए।”

गरबा क्यों विवाद में आया?

वक्फ बोर्ड प्रमुख ने कहा कि पिछले कुछ सालों में शिकायतें मिली हैं कि कुछ युवक अपनी पहचान छिपाकर गरबा पंडालों में प्रवेश करते हैं। कई बार छेड़छाड़ और विवाद की घटनाएं भी सामने आई हैं, जिससे समाज की बदनामी होती है। उनका कहना है कि गरबा आयोजनों का स्वरूप धार्मिक है, यह सिर्फ मनोरंजन या डांस प्रोग्राम नहीं है।

शर्तों पर दी सहमति

सलीम राज ने यह भी कहा कि अगर आयोजक की अनुमति हो और कोई युवक गरबा की परंपरा, संस्कृति और वेशभूषा का सम्मान करते हुए शामिल हो, तो किसी को आपत्ति नहीं होगी। लेकिन बिना अनुमति, पहचान छिपाकर या गलत नीयत से पंडालों में जाना ठीक नहीं है।

बयान से छिड़ी बहस

वक्फ बोर्ड का यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। एक वर्ग इसे सही ठहराते हुए कह रहा है कि हर धर्म के लोगों को एक-दूसरे की आस्थाओं का सम्मान करना चाहिए। वहीं दूसरी ओर, कुछ लोग इसे धार्मिक आधार पर रोक बताकर आलोचना कर रहे हैं। उनका कहना है कि भारत में हर नागरिक को अपनी मर्जी से किसी भी सांस्कृतिक कार्यक्रम में हिस्सा लेने का अधिकार है।

राजनीतिक रंग भी चढ़ा

विपक्षी दलों ने कहा कि ऐसे बयान समाज को बांटने का काम करते हैं और नवरात्र जैसे उत्सवों में राजनीति की कोई जगह नहीं होनी चाहिए।

वहीं समर्थकों का कहना है कि यह केवल धार्मिक आस्था और परंपरा की रक्षा के लिए दी गई सलाह है।

Share

Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *