काठमांडू: काठमांडू में इतिहास के सबसे हिंसक प्रदर्शनों में दर्ज हो गया। हजारों की संख्या में जुटे युवा संसद भवन की दीवारें फांदकर भीतर घुस गए। इनकी अगुवाई कर रही थी नई पीढ़ी यानी Gen-Z, जो सोशल मीडिया बैन और भ्रष्टाचार के खिलाफ लंबे समय से गुस्सा दबाए बैठी थी। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने सबसे पहले वॉटर कैनन और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। भीड़ को काबू न कर पाने पर रबर बुलेट और गोलियां दाग दी गईं।
मौत और घायल
- अब तक 19–20 प्रदर्शनकारियों की मौत की पुष्टि हो चुकी है।
- 300 से ज्यादा लोग घायल, जिनमें कई की हालत गंभीर।
- अस्पतालों में खून की कमी, डॉक्टरों की टीम लगातार ड्यूटी पर।
सरकार के कदम
- सेना की तैनाती और कई इलाकों में कर्फ्यू लागू।
- संसद भवन के बाहर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात।
- गृह मंत्री रमेश लेखक ने पद से इस्तीफा दिया।
- पीएम केपी शर्मा ओली पर जबरदस्त दबाव, संसद में विपक्ष लगातार सवाल खड़ा कर रहा।
आंदोलन की वजह
नेपाल सरकार ने हाल ही में 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बैन लगाया, जिनमें WhatsApp, YouTube और X (Twitter) भी शामिल हैं।
सरकार का तर्क – “फेक न्यूज और अफवाहों पर रोक”, लेकिन युवाओं ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया।
लंबे समय से चल रहे भ्रष्टाचार और बेरोजगारी ने भी इस गुस्से को और हवा दी।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
Amnesty International ने कहा – “पुलिस ने अंधाधुंध गोलियां चलाईं, यह मानवाधिकार का उल्लंघन है।” संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ ने नेपाल सरकार से निष्पक्ष जांच की मांग की। पड़ोसी भारत ने भी हालात पर चिंता जताई और सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी।
मौजूदा हालात
- राजधानी काठमांडू में सन्नाटा, जगह-जगह बैरिकेड और सेना की गश्त।
- कई जिलों में इंटरनेट सेवाएं बंद।
- विश्वविद्यालयों और स्कूलों में पढ़ाई ठप।
- प्रदर्शनकारी सोशल मीडिया पर ‘Restore Our Voice’ हैशटैग से अभियान चला रहे।
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