Home छत्तीसगढ़ डिप्टी सीएम के बंगले के सामने अनुकंपा नियुक्ति की मांग को लेकर महिला ने पिया फिनाइल
छत्तीसगढ़देश

डिप्टी सीएम के बंगले के सामने अनुकंपा नियुक्ति की मांग को लेकर महिला ने पिया फिनाइल

Share
Share

रायपुर. राजधानी रायपुर में शनिवार को बड़ा हंगामा खड़ा हो गया। डिप्टी सीएम के बंगले के सामने एक महिला ने फिनाइल पीकर आत्महत्या का प्रयास किया। महिला कई सालों से अनुकंपा नियुक्ति (पति की मृत्यु के बाद परिवार को नौकरी) की मांग कर रही थी। लेकिन उसे सिर्फ़ आश्वासन मिलता रहा। आखिरकार उसने मजबूरी में यह खौफनाक कदम उठाया।

वर्षों से कर रही थी संघर्ष

महिला ने बताया कि उसके पति की सरकारी सेवा के दौरान मौत हो गई थी। नियमों के अनुसार उसे अनुकंपा नियुक्ति मिलनी चाहिए थी। लेकिन आवेदन देने और सभी कागज जमा करने के बावजूद उसकी फाइल बार-बार विभागीय दफ्तरों में पेंडिंग होती रही। कई बार उसने कलेक्टर, विभागीय सचिव और मंत्री तक गुहार लगाई। हर बार कहा गया कि “जल्द नियुक्ति मिलेगी”, लेकिन फाइल आगे नहीं बढ़ी। इस चक्कर में महिला आर्थिक तंगी और मानसिक तनाव से गुजर रही थी।

 घटना के वक्त का नजारा

शनिवार दोपहर महिला सीधे डिप्टी सीएम के बंगले के सामने पहुंची। वहां कुछ देर तक अधिकारियों से मिलने की जिद करती रही। जब सुनवाई नहीं हुई तो अचानक उसने अपने बैग से फिनाइल की बोतल निकाली और पी लिया।यह देखकर मौके पर अफरा-तफरी मच गई। ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों ने तुरंत उसे रोका और अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों ने बताया कि समय पर इलाज मिलने से उसकी हालत अभी स्थिर है।

प्रशासन में हड़कंप

इस घटना की खबर फैलते ही प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया। डिप्टी सीएम बंगले पर तैनात अधिकारियों ने तुरंत मामले की जानकारी वरिष्ठ अफसरों को दी। विभागीय सचिव स्तर पर महिला की अर्जी की फाइल की जांच के आदेश दिए गए हैं। अफसरों का कहना है कि महिला की मांग पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

जनता में आक्रोश

बंगले के सामने हुई इस घटना के बाद वहां भीड़ जुट गई। लोगों ने सवाल उठाए कि किसी गरीब कर्मचारी की पत्नी को नौकरी देने में इतने साल क्यों लगते हैं? अगर समय पर सुनवाई हो जाती तो महिला को यह कदम नहीं उठाना पड़ता।

नियम क्या कहते हैं?

सरकारी सेवा में कार्यरत कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसके आश्रित (पत्नी, पुत्र या पुत्री) को “अनुकंपा नियुक्ति” दी जाती है। यह नियुक्ति परिवार की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए होती है। नियम है कि आवेदन मिलने के बाद विभाग एक तय समयसीमा में नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी करे। कई बार फाइलों में देरी और प्रशासनिक लापरवाही के कारण आवेदक सालों तक परेशान होते रहते हैं।

Share

Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *