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जंबूरी 2026 पर घोटाले का आरोप: कांग्रेस ने ACB-EOW में दी दस्तक, मंत्री गजेंद्र यादव पर FIR की मांग

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में प्रस्तावित रोवर-रेंजर जंबूरी 2026 को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस ने आयोजन से जुड़े टेंडर आबंटन में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए ACB/EOW कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई है। पार्टी ने मंत्री गजेंद्र यादव समेत सभी जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने और आयोजन को तत्काल रद्द करने की मांग की है।

कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने EOW पहुंचकर पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की। इस दौरान पीसीसी महामंत्री सुबोध हरितवाल ने कहा कि बालोद में 9 जनवरी से प्रस्तावित जंबूरी आयोजन की टेंडर प्रक्रिया शुरू से ही संदिग्ध रही है।

उन्होंने बताया कि आयोजन से जुड़ा टेंडर 20 दिसंबर को खोला जाना था, लेकिन बिना ठोस कारणों के उसे निरस्त कर दिया गया। इसके बाद महज 10 दिनों के भीतर दोबारा टेंडर जारी किया गया, जिसकी अंतिम तिथि 3 जनवरी तय की गई। हैरानी की बात यह है कि टेंडर प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही आयोजन स्थल पर अधिकांश कार्य लगभग पूरा हो चुका है।

सुबोध हरितवाल ने आरोप लगाया कि करोड़ों रुपये का काम जमीनी स्तर पर कर दिया गया, जबकि किसी भी कंपनी को अब तक आधिकारिक रूप से वर्क ऑर्डर जारी नहीं हुआ है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब निविदा प्रक्रिया अधूरी थी, तब निजी कंपनी को काम शुरू करने की अनुमति किसके आदेश पर दी गई।

कांग्रेस का दावा है कि मंत्री और विभागीय अधिकारियों के संरक्षण में पहले से तय कंपनी से काम कराया गया, जो सीधे-सीधे भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। इसी आधार पर कांग्रेस ने मंत्री गजेंद्र यादव सहित आयोजन से जुड़े सभी अधिकारियों पर भ्रष्टाचार का मामला दर्ज करने की मांग की है।

पार्टी ने GeM पोर्टल के जरिए होने वाली सरकारी निविदाओं की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए। कांग्रेस का कहना है कि जब टेंडर खुला ही नहीं था, उससे पहले ही निजी कंपनी द्वारा काम शुरू कर देना पूरी प्रक्रिया को संदेह के घेरे में डालता है।

कांग्रेस के अनुसार, बालोद स्थित शासकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज परिसर में जंबूरी आयोजन प्रस्तावित है। टेंडर खुलने से पहले ही वहां ‘भारत किराया भंडार’ नामक कंपनी के ट्रक, सामग्री और मजदूर मौजूद थे, जिससे यह सवाल खड़ा होता है कि कंपनी को पहले से सूचना किसने दी।

मामले को और गंभीर बताते हुए सुबोध हरितवाल ने कहा कि टेंडर दस्तावेजों में दर्ज अधिकारियों के मोबाइल नंबरों पर संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन सभी फोन बंद मिले। कांग्रेस ने इसे जवाबदेही से बचने की कोशिश करार दिया है।

कांग्रेस ने मांग की है कि जब तक यह स्पष्ट नहीं हो जाता कि टेंडर से पहले काम किसके निर्देश पर शुरू हुआ और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही, तब तक जंबूरी 2026 का आयोजन रद्द किया जाए। पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि मामले को दबाने का प्रयास हुआ, तो इसे सड़क से लेकर सदन तक जोर-शोर से उठाया जाएगा।

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