प्रदेश में प्रशासनिक तंत्र भ्रष्टाचार की ऐसी दलदल में फंस चुका है, जहां बिना ‘सुविधा शुल्क’ के आम आदमी का काम होना लगभग नामुमकिन हो गया है। सरकारी दफ्तरों में बैठे कर्मचारी और अधिकारी अब न सिर्फ खुलेआम रिश्वत मांग रहे हैं, बल्कि उनके भीतर से कानून और कार्रवाई का भय भी पूरी तरह खत्म होता दिखाई दे रहा है।
डर का खात्मा: ‘ऊपर तक सेटिंग’ का दावा
स्थिति यह है कि निचले स्तर के कर्मचारी भी बिना झिझक रिश्वत की मांग करते हैं। जब पीड़ित कार्रवाई की बात करता है, तो उसे यह कहकर चुप करा दिया जाता है कि “ऊपर तक हिस्सा जाता है।” यह रवैया साफ दर्शाता है कि भ्रष्टाचार अब व्यक्तिगत नहीं, बल्कि संगठित नेटवर्क का रूप ले चुका है।
क्यों नहीं है कार्रवाई का डर?
भ्रष्टाचार के मामलों में सख्त कार्रवाई न होने के पीछे कई गंभीर कारण सामने आते हैं—
- सुस्त जांच प्रक्रिया: विभागीय जांच वर्षों तक लटकी रहती है, जिससे आरोपी या तो सेवानिवृत्त हो जाते हैं या सबूतों के अभाव में बच निकलते हैं।
- नाममात्र की सजा: ट्रैप मामलों में पकड़े गए कर्मचारी कुछ समय निलंबन के बाद फिर से प्रभावशाली पदों पर बहाल हो जाते हैं।
- राजनीतिक संरक्षण: कई रसूखदार अधिकारियों को राजनीतिक संरक्षण मिलने से उन पर कार्रवाई करना मुश्किल हो जाता है।
आम जनता की पीड़ा
एक पीड़ित नागरिक का कहना है,
“राशन कार्ड हो या जमीन के कागज, महीनों चक्कर लगाने पड़ते हैं। जब तक बाबू की जेब गरम न हो, फाइल आगे नहीं बढ़ती।”
जमीनी सच्चाई
हाल के महीनों में लोकायुक्त और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की कार्रवाई में भले ही तेजी आई हो, लेकिन यह केवल भ्रष्टाचार की ऊपरी परत को ही छू पा रही है। तहसील कार्यालयों, जनपद पंचायतों और विकास प्राधिकरणों में फैला भ्रष्टाचार विकास योजनाओं को भीतर से खोखला कर रहा है।
यदि समय रहते सख्त कानून और ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को सख्ती से लागू नहीं किया गया, तो यह प्रशासनिक सड़न प्रदेश के भविष्य के लिए घातक साबित हो सकती है।
ACB का दावा
एसीबी-ईओडब्ल्यू के प्रमुख अमरेश मिश्रा के अनुसार,
“साल 2025 में एसीबी द्वारा 60 ट्रैप प्रकरण दर्ज किए गए हैं, जबकि 44 स्थानों पर सर्च ऑपरेशन चलाया गया। भ्रष्टाचार के खिलाफ यह अभियान लगातार जारी रहेगा।”
जिलेवार कार्रवाई: कहां कितने मामले?
| जिला | दर्ज प्रकरण | गिरफ्तार आरोपी |
|---|---|---|
| सूरजपुर | 10 | 10 |
| मुंगेली | 06 | 09 |
| रायपुर | 05 | 06 |
| रायगढ़ | 05 | 05 |
कार्रवाई के प्रमुख बिंदु
- सबसे ज्यादा गिरफ्तारी: पटवारियों की संख्या सर्वाधिक रही
- सर्च ऑपरेशन: 44 आरोपियों के ठिकानों पर सघन तलाशी
- औसत कार्रवाई: हर महीने 5 से 6 भ्रष्ट लोक सेवक गिरफ्त में
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