देहरादून में त्रिपुरा के एक छात्र की हत्या के मामले ने पूरे देश को झकझोर दिया है। इस घटना पर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने गहरा शोक जताते हुए कहा कि देश के अन्य राज्यों में पूर्वोत्तर भारत और वहां के लोगों के बारे में जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है।
गुरुवार को मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि देहरादून में त्रिपुरा के छात्र एंजेल चकमा की हत्या जैसी घटनाएं नस्लीय सोच का परिणाम हैं, जिन्हें रोकने के लिए समाज को शिक्षित करना अनिवार्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह की घटनाओं पर सख्त कार्रवाई ही भविष्य में ऐसे अपराधों को रोक सकती है।
दोषियों को सख्त सजा की मांग
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस जघन्य घटना में शामिल आरोपियों को जल्द गिरफ्तार कर कड़ी से कड़ी सजा दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा,
“यदि दोषियों को कठोर दंड मिलता है तो यह पूरे देश में एक मजबूत संदेश देगा और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सकेगा।”
“पूर्वोत्तर के लोग गर्व से भारतीय हैं”
हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि पूर्वोत्तर भारत के निवासी गर्व से भारतीय हैं और देश के अन्य हिस्सों के लोगों को इस क्षेत्र की संस्कृति, पहचान और नागरिकों के प्रति संवेदनशील होना चाहिए। उन्होंने पूर्वोत्तर और शेष भारत के बीच संवाद और आपसी समझ बढ़ाने पर भी जोर दिया।
घटना को बताया बेहद दुर्भाग्यपूर्ण
मुख्यमंत्री ने छात्र की मौत को अत्यंत दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए शोकाकुल परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में ऐसी घटनाएं सामने नहीं आई थीं और उन्हें उम्मीद है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगेगी।
आंकड़ों पर सरकार का पक्ष
जब उनसे बाहर पढ़ने वाले पूर्वोत्तर छात्रों के आंकड़ों को लेकर सवाल किया गया, तो मुख्यमंत्री ने कहा कि फिलहाल सरकार के पास कोई समेकित डेटा उपलब्ध नहीं है, लेकिन आवश्यकता पड़ने पर ऐसे आंकड़े एकत्र कर सुरक्षित रखे जा सकते हैं।
क्या है पूरा मामला?
त्रिपुरा निवासी 24 वर्षीय एंजेल चकमा देहरादून में एमबीए की पढ़ाई कर रहे थे। आरोप है कि नशे में धुत कुछ लोगों ने उन पर हमला किया और नस्लीय गालियां दीं। गंभीर रूप से घायल चकमा की 16 दिनों बाद इलाज के दौरान मौत हो गई। इस घटना के बाद पूर्वोत्तर राज्यों सहित दिल्ली में भी छात्रों ने व्यापक विरोध प्रदर्शन किया।
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