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सरगुजा में इतिहास रचा: जनजातीय गौरव दिवस पर राष्ट्रपति मुर्मू का बड़ा संदेश—ये संस्कृति खत्म नहीं होने दूंगी

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जनजातीय गौरव दिवस 2025 के मौके पर सरगुजा का अंबिकापुर गुरुवार को ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बना, जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जनजातीय समाज के बीच पहुंचीं। कार्यक्रम में भाग लेते हुए उन्होंने कहा कि “आदिवासी संस्कृति सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि इस देश की आत्मा है—इसे जीवित रखना हमारी ज़िम्मेदारी है।”

राष्ट्रपति ने गौरव के साथ कहा कि वे स्वयं जनजाति समाज से आती हैं, इसलिए उनकी इस विरासत से जुड़ाव भावनात्मक भी है। भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण को उन्होंने अपने लिए “सौभाग्य” बताया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के जनजातीय समुदाय ने अपनी संस्कृति, बोली और परंपराओं को जिस मजबूती से संजोकर रखा है, वह पूरे देश के लिए प्रेरणादायक है।

अपने भाषण में राष्ट्रपति मुर्मू ने शिक्षा, स्वास्थ्य, जल-जंगल-जमीन और सांस्कृतिक संरक्षण को आदिवासी विकास की सबसे बड़ी प्राथमिकता बताया। साथ ही उन्होंने विश्वास जताया कि केंद्र और राज्य सरकारों के संयुक्त प्रयासों से वामपंथी उग्रवाद पूरी तरह समाप्त होगा।

छत्तीसगढ़–ओडिशा: रोटी और बेटी का रिश्ता

राष्ट्रपति ने छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच सदियों पुराने भाईचारे का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों राज्यों के लोगों में “रोटी और बेटी का संबंध” है। उन्होंने बताया कि झारखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ की जनजातीय विरासत एक धरोहर है, जिसने हमेशा देश की संस्कृति को समृद्ध किया है।

सीएम विष्णु देव साय ने कहा—जनजाति संघर्ष की कहानी अब इतिहास का गौरव

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि जनजातीय समाज के संघर्ष, बलिदान और क्रांतियां हमेशा अमर रहेंगी। उन्होंने यह भी बताया कि तेंदूपत्ता संग्रह करने वाले परिवारों की आय बढ़ाने के लिए सरकार ने उसका समर्थन मूल्य 4,000 से बढ़ाकर 5,000 रुपये कर दिया है।

उन्होंने कहा कि रायपुर में बन रहा जनजातीय संग्रहालय, छत्तीसगढ़ की आदिवासी विरासत को दुनिया के सामने पेश करेगा।

“बस्तर में नक्सलवाद अंतिम सांसें गिन रहा है”

मुख्यमंत्री ने दावा किया कि बस्तर में नक्सलवाद लगभग खत्म होने की कगार पर है। वहां तेज़ी से विकास कार्य बढ़ रहे हैं—बिजली, पानी और दूरसंचार जैसी सुविधाएं अब उन इलाकों तक पहुंच रही हैं, जो पहले नक्शे पर सिर्फ नाम भर थे।

सरगुजा में मनाया गया जनजातीय गौरव दिवस 15 से 20 नवंबर के बीच भव्य रूप से संपन्न हुआ, और राष्ट्रपति का आगमन इस उत्सव को और यादगार बना गया।

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