बस्तर ओलंपिक 2025-26 का आयोजन इस बार भी बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य बस्तर अंचल के युवाओं को खेलों की मुख्यधारा से जोड़ना और उनकी छिपी हुई प्रतिभाओं को सामने लाना है। राज्य शासन ने इस आयोजन को ऐतिहासिक पहल के रूप में देखा है, जो न केवल खेलों को बढ़ावा देगा बल्कि युवाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने में भी अहम भूमिका निभाएगा।
इस आयोजन का शुभंकर “वन भैंसा” और “पहाड़ी मैना” होंगे, जिनका उपयोग व्यापक प्रचार-प्रसार में किया जाएगा। शासन ने सभी जिलों को निर्देश दिए हैं कि प्रतियोगिता में अधिक से अधिक भागीदारी सुनिश्चित की जाए। पंजीयन की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है और सभी स्तरों पर इसकी तैयारी तेज कर दी गई है।
बस्तर ओलंपिक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें नक्सल हिंसा से प्रभावित और आत्मसमर्पण कर चुके नक्सलियों को भी सहभागिता का अवसर दिया जाएगा। इससे उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का मार्ग प्रशस्त होगा। प्रतियोगिताएँ वेटलिफ्टिंग और हॉकी जैसे खेलों से लेकर विकासखंड और संभाग स्तर तक विभिन्न खेलों में आयोजित की जाएँगी।
राज्य शासन की मंशा है कि बस्तर की खेल प्रतिभाओं को राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर अवसर मिले। साथ ही, युवाओं को सकारात्मक दिशा प्रदान की जाए। इस आयोजन की जिम्मेदारी खेल एवं युवा कल्याण विभाग के पास होगी, जबकि गृह (पुलिस) विभाग को नोडल विभाग नियुक्त किया गया है। इसके अलावा जिला और संभाग स्तर पर समितियों का गठन भी प्रशासनिक निर्देशों के अनुसार किया गया है।
अंततः, बस्तर ओलंपिक न केवल एक खेल महोत्सव है, बल्कि यह युवाओं को नई पहचान देने, समाज और शासन के बीच संबंधों को मजबूत करने और शांति-सामाजिक विकास की ओर एक बड़ा कदम है।
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