नई दिल्ली/तिआनजिन : भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 7 साल बाद शनिवार को चीन पहुंचे, जहां वे शंघाई सहयोग संगठन (SCO) समिट में हिस्सा लेंगे। यह दौरा दोनों देशों के बीच रिश्तों और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पीएम मोदी की इस यात्रा के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ द्विपक्षीय बातचीत भी होगी, जिससे वैश्विक और क्षेत्रीय चुनौतियों पर भारत की भूमिका और मजबूत होगी।
क्या है इस दौरे का मकसद?
पीएम मोदी की यह यात्रा 2018 के बाद पहली बार चीन में हो रही है, जब उन्होंने वुहान में शी जिनपिंग के साथ अनौपचारिक शिखर वार्ता की थी। तिआनजिन में होने वाली SCO समिट में भारत अपनी सक्रिय और रचनात्मक भूमिका निभाएगा। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, इस समिट में आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। पीएम मोदी शनिवार शाम तिआनजिन पहुंचे और रविवार को समिट की औपचारिक शुरुआत होगी।
जिनपिंग और पुतिन से मुलाकात की तैयारी
सूत्रों के अनुसार, पीएम मोदी चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ भारत-चीन सीमा विवाद और व्यापारिक रिश्तों पर बातचीत करेंगे। इसके अलावा, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से ऊर्जा और रक्षा सहयोग पर चर्चा होगी। पीएम मोदी ने ट्वीट कर कहा, “तिआनजिन पहुंच गया हूं। SCO समिट में विचार-विमर्श और विश्व नेताओं से मुलाकात के लिए उत्साहित हूं।” यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब भारत-चीन संबंधों में तनाव के बाद सामान्यीकरण की कोशिशें चल रही हैं।
भारत की रणनीति क्या होगी?
विशेषज्ञों का मानना है कि पीएम मोदी इस मंच का इस्तेमाल भारत को क्षेत्रीय शक्ति के रूप में पेश करने के लिए करेंगे। SCO में भारत के लिए आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई और अफगानिस्तान में शांति बहाली अहम मुद्दे होंगे। साथ ही, चीन के साथ सीमा पर शांति बनाए रखने पर भी जोर रहेगा। विदेश सचिव विनय क्वात्रा ने बताया, “यह यात्रा भारत की क्षेत्रीय और वैश्विक भूमिका को मजबूत करेगी।”
चीन में भारतीय समुदाय का स्वागत
पीएम मोदी का स्वागत तिआनजिन में भारतीय समुदाय ने जोरदार तरीके से किया। समुदाय के लोग तिरंगा लहराते और गीत गाते नजर आए। एक स्थानीय भारतीय ने कहा, “7 साल बाद पीएम का आना हमारे लिए गर्व की बात है। हमें उम्मीद है कि यह दौरा भारत-चीन संबंधों को नई दिशा देगा।”
आगे क्या?
पीएम मोदी की यह यात्रा 1 सितंबर तक चलेगी, जिसके बाद वे जापान के लिए रवाना होंगे, जहां वे भारत-जापान शिखर वार्ता में हिस्सा लेंगे। इस बीच, भारत की नजर SCO में अपनी स्थिति को और मजबूत करने पर होगी। चीन में उनकी मौजूदगी से क्षेत्रीय शांति और सहयोग को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
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